"हे मर्यादा पुरुषोत्तम मेरे देश की भीड़ को संयम और विवेक दीजिए" शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह

"O Maryada Purushottam give restraint and discretion to my country's crowd" Martyr Inspector Subodh Kumar Singh share via Whatsapp

"O Maryada Purushottam give restraint and discretion to my country's crowd" Martyr Inspector Subodh Kumar Singh

वयंगकार- अशफाक अहमद खाँ

लखनऊः
सुबोध साहब, हमें यक़ीन है कि आप स्वर्ग से हम लोगों को देख रहे होंगे , मन में एक टीस सी होती होगी यह देखकर कि जिस कानून की हिमायत में अपनी जिंदगी मिटा दी, वही कानून आपको, आपके परिवार को इंसाफ नहीं दे सका ।  देश में बढ़ रहे साम्प्रदायिकता के ज़हर को देखकर आप स्वर्ग में भी विचलित हो रहे होंगे । आपके दुनिया से चले जाने के बाद यहां काफ़ी बदलाव आ गया है , जाति धर्म की दीवारें और ऊँची हो गई हैं। रंगों ने भी अपना अपना धर्म चुन लिया है ।  गाय जिसनें कभी जुम्मन को जीवन दिया अब वही उसकी मौत का सबब बन गई है । भारत माता के जिस पवित्र नारे ने हमेशा अमानवीयता अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की है ,वहीं  नारा अब हत्यारों का विजय घोष बन गया है । सुबोध साहब आप तो पुलिस विभाग में रहें हैं आपको तो पता ही होगा कि हमारी न्याय पालिका पर मुकदमों का कितना बड़ा बोझ है। सीमित न्यायधीशों के सामने फाइलों के पहाड़ समय पर न्याय देने में सब से बड़ी बाधा बने हुए हैं । इधर जब से राष्ट्रवाद का तूफ़ान आया है इन देश भक्तों को न्यायाधीशो की परेशानी देखी नहीं जाती।  राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हुए राष्ट्रवादी भीड़ अब खुले आम अपना फैसला सुनाती है। यह भीड़ केवल बुलंदशहर में नहीं बल्कि हर शहर ,गाँव क़स्बे में पूरी मुस्तैदी से अपना फैसला देने को आतुर हो चुकी है । अब तो जनता भी भीड़ के इंसाफ़ पर गदगद हो मिठाई बाँटती खुशियां मनाती है । सुबोध कुमार साहब क्या आपको अपनी मिट्टी की याद नहीं आती , जिस देश और देशवासियों के लिए आपने अपना जीवन न्योछावर कर दिया स्वर्ग पहुंचे ही उसको भूल गए ? आप संतुष्ट होंगे कि अपना कर्तव्य निभा दिया है । आगे की जिम्मेदारी किसी दूसरे सुबोध की है । यह दूसरा सुबोध कहाँ से आएगा । समाज के उस भीड़ में से जो झूठे राष्ट्रवाद की अफ़ीम में मस्त हो नैतिक-अनैतिक का भेद भूल चुकी हो  ?   उस भीड़ को जिसे मानव धर्म की चिंता नहीं  । एक अनजान भय इस भीड़ को चैन नहीं लेने देती। हर क्षण उसको अपना धर्म खतरे में दिखाई पड़ता है। इस डर के बीच कब वे भक्त से हत्यारे बन गए ना उन्हें इसका एहसास है और ना ही पश्चताप। हिंसा उग्रता और आक्रामकता के जुनून में वे मर्यादा भूल गए अपनी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की भी । इस भीड़ की कल्पनाओं में भगवान श्रीराम मात्र एक योद्धा तक सीमित कर दिए गए।प्रेम , करुणा ,त्याग , मर्यादा ,संयम एवं राजधर्म के गुण शायद इस भीड़ को भगवान राम में नहीं दिखते। इन्हें कुछ दिखता है तो वह केवल तीर और कमान। इन हालात में सुबोध कुमार सिंह कौन बनेगा और कौन बनने देगा। आखिर वह कौन ऐसी पत्नी और बेटा होगा  जो अपने शहीद पति- पिता के हत्यारों के विजय घोष को अपने कानों से सुन कर विचलित नहीं होगा । माफ करिएगा सुबोध साहब मैंने आपको शहीद कह दिया। स्वर्ग में भले ही आपकी शहादत को ऊंचा मर्तबा मिला हो मगर हम तो पृथ्वी लोक के नियम को ही मानने को विवश हैं। सरकार जो कहेगी उसे ही अंतिम सत्य मानेंगे । जिस सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए आपने अपनी जान गवाई है वह सरकार ही आपको शहीद नहीं मानती । तो चाह कर भी  हम कैसे आपको शहीद कह दें । यह तो सरकार से असहमति होगी। यह तो आपको भी पता होगा कि अपने नए भारत में सरकार ही राष्ट्र है और इसका विरोध करना मतलब राष्ट्र का विरोध करना। यह तो गनीमत है कि स्वर्ग के बड़े बाबू चित्रगुप्त शहीदों के मामले में पृथ्वी लोक की सरकारों से शहीदों का  वेरिफिकेशन नहीं मांगते वरना पुलवामा के शहीदों से लेकर आप तक को भी स्वर्ग में अपनी शहादत साबित करने के लिए तमाम जद्दोजहद करना पड़ता। बहरहाल पृथ्वी लोक में आपके हत्यारों को जमानत और शौर्य सम्मान दोनों मिल गया है। इसलिए आपका ध्यान आ गया । सोचा दो चार बातें कर ही लें वरना हम भारतवासी तो देश को विश्व गुरु बनाने में लगे हैं , हमें इतनी फुर्सत कहां कि हम देश के शहीदों को याद कर आंसू  बहायें । वैसे भी दया ,करुणा ,आंसू यह कमजोरी की निशानी है। चलते चलते  एक बात और पूछ रहा हूं । स्वर्ग में घूमते हुए क्या आपको वह मासूम बच्ची आसिफा , पहलू खान ,तबरेज अंसारी और मथुरा के भारत यादव जी से मुलाकात होती है क्या ?  क्या वे अपने मुकदमे को लेकर आपकी तरह अभी भी आशावान हैं। इंसाफ मिलने की उम्मीद उनके दिलों में कायम हैं या फिर वह भी हमारी तरह पुलिस और अदालतों से नाउम्मीद हो चले हैं। सुबोध कुमार साहब आप तो बड़े मिलनसार व्यक्ति थे । स्वर्ग में बहुत से देवताओं से आपकी जान पहचान हो गई होगी । उनसे कहिए ना कि भारत की अंधी भीड़ को थोड़ा विवेक दे दें। उनके दिलों में व्याप्त नफरतों के जहर को निकालकर कुछ  कतरे दया और संयम के डाल दे। शहीदों का मर्तबा हमने धर्मगुरुओं से सुन रखा है ,अगर देवता टालमटोल करें तो आप सीधे मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार में हाजिर हो जाइए। जिस मिट्टी की खातिर आपने अपने प्राण दे दिए ,उस धरती को आप अपनों के खून से लथपथ आखिर कैसे देख सकते हैं । देश की चिंता आप नहीं करेंगे तो क्या सदन में बैठा नेता करेगा ?  हो सके तो अपने साथ पहलू खान ,जुनैद और मथुरा वाले भारत यादव को भी मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार में साथ ले जाएं। आप श्री राम जी से कहे कि " हे प्रभु आपकी जन्म व कर्म भूमि पर कैसे-कैसे अत्याचार हो रहे हैं "। जुनैद को आगे करके बताइएगा कि प्रभु आपके इस बच्चे को  भीड़ ने आपका नाम लेकर और आपके नाम पर मार डाला है। प्रभु यह भीड़ स्वयं को आपका भक्त कहती है और आपका नाम लेकर मज़लूमों को मारती है । प्रभु आपने तो ना जाने कितने असुरों का वध किया है क्या आपने भी वध करने से पूर्व असुरों से अपने नाम का जयकारा लगवाया है  ,यदि नहीं तो फिर यह कथित राम भक्त आप ही के संतान को जय श्री राम के घोष के साथ क्यों मौत के घाट उतार देते हैं। क्या सरकारों की तरह आप भी इन्हें दोयम दर्जे की संतान मानते हैं ? प्रभु क्या आप जुनैद से प्रेम नहीं करते ?  मैं यह मानने को तैयार नहीं हूँ । सृष्टि के हर कण पर आपका समान प्रेम बरसता है फिर जुनैद आपके प्रेम से वंचित कैसे हो सकता है। इंस्पेक्टर सुबोध साहब आप श्री राम के दरबार में जरा सी भी झिझक ना करिएगा क्योंकि वहाँ न्याय किसी खण्डपीठ के बहुमत के आधार पर नहीं होता है । उस दरबार में फैसला नहीं सुनाया जाता बल्कि न्याय दिया जाता है । साहब मौका लगें तो प्रभु श्री राम से अपने देश मे सामाजिक भाईचारा और अमन चैन का वरदान मांग लीजिएगा । हमें यक़ीन है कि प्रभु आपकी विनती को इनकार नहीं कर सकते  ,क्योंकि  आपकी शहादत को  मर्यादा पुरुषोत्तम से बेहतर कोई समझ ही नहीं सकता ।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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