कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा कोविड मामलों में भारी वृद्धि से निपटने के लिए दिल्ली को सहायता की पेशकश

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पंजाब में कोविड की दूसरी लहर के लिए तैयार रहने की ज़रूरत पर दिया ज़ोर

पंजाब में स्वास्थ्य ढांचे की मज़बूती के लिए 107 नए स्वास्थ्य केन्द्रों का किया आगाज़

कोविड के खि़लाफ़ लोगों को भागीदार बनने के लिए अपील-मिशन फतेह के संकल्प के तौर पर ‘मास्क ही दवा है’ का ऐलान

इंडिया न्यूज सेंटर,चंडीगढ़:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा आज दिल्ली में बड़े पैमाने पर बढ़ रहे कोविड मामलों से निपटने में हर संभव सहायता देने की पेशकश की गई और मुख्यमंत्री ने राज्य में महामारी की रोकथाम में बेमिसाल काम कर रहे पंजाब के कोविड योद्धओं की दिल से सराहना की। उन्होंने भरोसा दिया कि कोविड महामारी की दूसरी लहर के खि़लाफ़ तैयारी के ख़ातिर स्वास्थ्य सुविधाओं की मज़बूती के लिए पंजाब सरकार पूरी तरह तैयार है।

पंजाब में कोविड की दूसरी लहर से निपटने के लिए पंजाब सरकार द्वारा हर संभव कदम उठाने का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘दिल्ली सख़्त लड़ाई लड़ रही है और ज़रूरत पडऩे पर हम हर सहायता के लिए तत्पर हैं। मैं यह पहले कह चुका हूँ।

मुख्यमंत्री ने सचेत करते हुए कहा यह कोई नहीं जानता कि पंजाब में दूसरी लहर कब आएगी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एन.सी.आर) और अन्य राज्यों/क्षेत्रों के तजुर्बे दिखाते हैं कि यह संभावित तौर पर यह ज़रूर घटेगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और ओ.टी.एस. मुलाजि़मों पर पूरा विश्वास जताया कि वह इस चुनौती के खि़लाफ़ फिर पूरी एकजुटता से लड़ेंगे।

स्वास्थ्य कर्मचारियों और अगली कतार के मुलाजि़मों, जिनमें बहुत से ख़ुद कोविड से प्रभावित हुए और कोविड ने कईयों की जान भी ले ली, की हर सहायता करना राज्य सरकार की जि़म्मेदारी है, यह कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों की भी यह जि़म्मेदारी बनती है कि वह इस महामारी के खि़लाफ़ राज्य सरकार का साथ देते हुए सभी सुरक्षा नियमों की पालन करें। उन्होंने आने वालेे कुछ महीनों के लिए, जब तक कोविड की दवा नहीं आ जाती,‘मास्क ही दवा है’ को मिशन फतेह के संकल्प के तौर पर घोषित किया।

राज्य में स्वास्थ्य ढांचे की मज़बूती और राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मरीज़ों के घरों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच करवाने के लिए 107 तंदुरुस्त पंजाब स्वास्थ्य केन्द्रों का डिजीटली आग़ाज़ करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य एवं मैडीकल शिक्षा विभागों के यत्नों की सराहना की गई, जिन्होंने केवल तीन वर्षों में ही इन केन्द्रों की कामयाबी की कहानी सृजन की है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में पंजाब को पहले दर्जे का राज्य बनाने में राज्य सरकार का साथ देने के लिए लोगों को न्योता देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं की मज़बूती पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ख़ासकर दूसरे और तीसरे दर्जे की सुविधाओं पर, जिसका उद्देश्य बिना देरी टेस्टिंग और इलाज के साथ कीमती जानें बचाना है। लोगों को भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाने, घरों के अंदर रहने, बड़े जलसे और सामाजिक समागम न करने के लिए अपील करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा पूरी सावधानियां खासकर बार-बार हाथ साफ़ करने और मास्क पहनने के लिए ज़ोर दिया गया।

महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे और तीसरे स्तर की इलाज सुविधाओं में मरीज़ों के लिए इलाज व्यवस्था और टेस्टिंग सुविधाएं बड़े पैमाने पर बढ़ाने के साथ-साथ प्लाज़्मा बैंक खोले जा चुके हैं और मिशन फतेह के अंतर्गत घरों के अंदर एकांतवास वाले मरीज़ों को मुफ़्त कोरोना किटें दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 184.95 करोड़ की लागत से कोविड-19 महामारी के दौरान पी.पी.ई. किटें, एन-95 मास्क और अन्य सामान अगली कतार के स्वास्थ्य कर्मचारियों को सप्लाई किए जा चुके हैं। स्तर-1, 2 और 3 की सुविधाओं में सभी कोविड मरीज़ों के लिए 5.57 करोड़ की दवाएँ मुहैया करवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि स्तर तीन के सभी इलाज केन्द्रों में वेंटिलेटर सुविधा और ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया रकवाए गए हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि आर.टी.-पी.सी.आर, रैपिड एंटीजन और ट्रूनैट टैस्ट सुविधा सभी संदिग्ध कोरोना मरीज़ों के लिए मुहैया करवाई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए हैल्थ और वैलनैस केंद्र कोविड महामारी के दौरान राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को योग्यता पक्ष से नई ऊँचाई पर पहुंचाएंगे। यह केंद्र समूचे राज्य के अंदर लोगों तक बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में राज्य सरकार की बहुपक्षीय और दूरगामी सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के अंदर खोले जाने वाले 3049 केन्द्रों में से अब तक 2046 अब कार्यशील हो चुके हैं और अन्य 800 आने वाले दो महीनों में चालू हो जाएंगे और बाकी रहते 2021 में चालू हो जाएंगे।


मुख्यमंत्री ने बताया कि कम्युनिटी हैल्थ अफसरों, मल्टीपर्पज़ स्वास्थ्य कर्मचारियों (महिला और पुरुष) और आशावर्करों की तैनाती वाले इन केन्द्रों में 27 किस्म की दवाएँ, 6 किस्म के टैस्ट, टैलिफ़ोन के ज़रिए डॉक्टरी सलाह की सुविधाएं मुहैया हैं। उन्होंने आगे कहा कि 54 लाख मरीज़ों को मानसिक तनाव, मधूमेह और अन्य बीमारियों सम्बन्धी ओ.पी.डी सेवाएं मुहैया करवाई जा चुकी हैं।

यह बताते हुए कि अगस्त 2020 में भारत सरकार द्वारा राज्य के दर्जे सम्बन्धी जारी सूची में उचित समय पर यह केंद्र चालू करने के लिए पंजाब भारत में पहले नंबर पर है, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा साल 2020-21 के लिए दिए गए लक्ष्य (142 फीसदी) को पंजाब पहले ही प्राप्त कर चुका है।

मुख्यमंत्री द्वारा सरबत सेहत बीमा योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा, स्कूल हैल्थ प्रोग्राम, हैपेटाईट्स-सी के 90 हज़ार मरीज़ों के मुफ़्त इलाज, 25 हज़ार कैंसर मरीज़ों को दी गई वित्तीय सहायता, रेगुलर और कांट्रैक्ट पर भर्ती किए गए डॉक्टरों/माहिरों/पैरामेडिकल स्टाफ आदि की भर्ती के अलावा उनकी सरकार द्वारा पिछले तीन सालों के दौरान उठाए गए अन्य कदमों का भी जि़क्र किया गया। उन्होंने कहा कि इस समय के दौरान अन्य पहलकदमियों के अलावा राज्य सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य, नशा-मुक्ति कार्यक्रम, मुफ़्त दवाएँ और नयी ऐम्बूलैंसों के साथ संख्या में वृद्धि जैसे अन्य कदम भी उठाए गए हैं।
    
इस मौके पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि मरीज़ों खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के अंदर उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के लिए राज्य सरकार पड़ाववार सभी सब-केन्द्रों को हैल्थ और वैलनैस्स केन्द्रों में तबदील करेगी। उन्होंने कहा कि मार्च 2019 से करीब 55.8 लाख मरीज़ ओ.पी.डी सेवाएं ले चुके हैं और अन्य 20 लाख व्यक्ति मानसिक दबाव, 12 लाख मधूमेह के लिए और 17 लाख कैंसर (मुँह, छाती और सरवाईकल) के इलाज के लिए स्क्रीनिंग करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा 14 लाख मरीज़ों को दवाएँ और 18 लाख मरीज़ अलग-अलग तरह के टैस्ट करवा चुके हैं।

स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने बताया कि नए केन्द्रों का आग़ाज़ विभाग के लिए ऐतिहासिक दिन है। मुख्य सचिव विनी महाजन द्वारा बढिय़ा रिकवरी दर वाले राज्य पंजाब के अंदर कोविड की रोकथाम के लिए सख़्त मेहनत करने वाले हैल्थ और मैडीकल शिक्षा स्टाफ को बधाई दी गई। परन्तु उनकी तरफ से उच्च मृत्यु दर, जो कि अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के कारण है, को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के लिए सचेत किया गया।

डिजिटल आग़ाज़ समागम के दौरान कई हैल्थवर्करों द्वारा कोविड मरीज़ों के इलाज और महामारी के खि़लाफ़ जंग से निपटने संबंधी अपने तजुर्बे साझे किए गए। जालंधर में बतौर नर्स काम कर रही कमलजीत कौर ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा न केवल स्वास्थ्य स्टाफ के लिए सुरक्षा उपाए यकीनी बनाए गए बल्कि मुकम्मल प्रशिक्षण भी मुहैया करवाया गया। सरकारी मैडीकल कॉलेज पटियाला में लैब इंचार्ज डा. उपेंदर बख्शी ने बताया कि 12 जिलों के लिए कोविड टैस्ट मुहैया करवाने के लिए इस लैब को थोड़े समय के दौरान ही आधुनिक रूप दिया गया।

पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग, अनुसंधान और मैडीकल शिक्षा विभाग के डॉक्टरों, नर्सों और हैल्थवर्करों समेत पैरामैडिक्स समेत अलग-अलग अगली कतार के कोरोना योद्धाओं द्वारा इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ कोविड मरीज़ों के इलाज संबंधी अपने तजुर्बे साझे किए गए और कोविड महामारी के इस नाजुक समय के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए गए। इस मौके पर अन्यों के अलावा पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान बरिन्दर ढिल्लों ने भी संबोधन किया।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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