खुलेआम घूम रहे दहेज हत्या के आरोपी

Openly roaming accused of dowry murder share via Whatsapp

Openly roaming accused of dowry murder

बेटियों के विरुद्ध हिंसा पर गंभीर नहीं है मल्हीपुर पुलिस

अशफाक खाँ, बहराइच/श्रावस्तीः 
महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर होने का दावा कर रही मल्हीपुर पुलिस के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। दहेज हत्या जैसे संगीन अपराधों के आरोपी पुलिस से बेखौफ हो चौराहों पर चुनावी चर्चा करने में मशगूल हैं । फिर भी सक्रियता के नाम पर मल्हीपुर पुलिस वारंटियों तथा पांच - दस  लीटर अवैध शराब के डिब्बों के साथ सेल्फी लेने तक में ही संतुष्ट दिख रही है । एक प्रकार से कहें तो इस तरह की पुलिस छूट से आरोपियों को पीड़ित पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रलोभन, सामाजिक दबाव या फिर धमकियों के सहारे सुलह का दबाव बनाने का पर्याप्त अवसर मिल जाता है । महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को लेकर तमाम सामाजिक संगठनों का संघर्ष , सरकार की कोशिशों तथा  न्यायपालिका की गंभीरता के बावजूद दहेज हत्या जैसे सामाजिक कोढ़ से अब तक निजात नहीं मिल पाई है । ऐसी वारदातों से पीड़ित परिवार को समय पर न्याय दिलाने में पुलिस की भूमिका कैसी है और कैसी होनी चाहिए  इस पर पुनः मंथन करने की जरूरत है । पूछिए उस पिता से जिसने अपनी बेटी को फंदों पर झूलते या फिर अधजली माँस के लोथड़े के रूप में देखा है । बेटी के हत्यारे कोई भी हो पर पिता इस आत्म ग्लानि से जीवन भर उबर नहीं पाता कि उसकी कमजोर माली हालत ने दहेज़ की माँग को क्यों अनसुना कर दिया । ऐसे परिवारों के आंसू पोछने में  पुलिस क्यों हिचकिचा रही है , क्या मल्हीपुर पुलिस बेटियों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है ।या फिर अभी भी वह इन्हें परिवार का बोझ समझती है ? इनकी मौजूदा कार्यशैली तो इसी ओर इशारा कर रही है । जानकारी के मुताबिक बहराइच के  दरगाह थाना क्षेत्र के खैरा हसन निवासी आदिल खाँ ने अपनी बेटी तबस्सुम (24 ) की शादी श्रावस्ती जनपद के मल्हीपुर थाना क्षेत्र के गंगापुर कला निवासी मो0 रजा के साथ दो वर्ष पूर्व में की थी । पिता आदिल का आरोप है कि उसके दामाद मो0रजा और उनका चाचा मो0 फारूक पिछले 6 महीने से दहेज में एक लाख रुपये की मांग करते रहे थे । अपनी खराब माली हालत के कारण आदिल उक्त रकम की मांग पूरी नही कर सका जिसके कारण उसकी बेटी को ससुराल में मारा पीटा जाता था । आदिल कहते हैं कि एक मार्च 2019 की सुबह  बेटी का फोन आया कि उसे जल्दी से ससुराल से घर ले आएं वरना ससुराल के लोग उसकी हत्या कर सकते हैं ।  मायके वाले जब तक चलने की तैयारी करते तब तक दोबारा फोन आता है कि उनकी बेटी तबस्सुम की मौत हो गई है । घटना स्थल से ससुराल के लोग फ़रार हो गए थे । मृतका के पिता आदिल की तहरीर पर मल्हीपुर थाने पर पति मो0रजा , उसके चाचा मो0 फारूक व परिवार के अन्य अन्य सदस्यों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत हो गया । पुलिस के आला अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया था कि आरोपी जल्दी ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे । मगर समय बीतने के साथ ही उक्त मामले को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया । आलम यह है कि आरोपी पुलिस से बेखौफ होकर स्थानीय होटलों पर चाय की चुस्कियों के साथ चुनावी चर्चा करते घूम रहे हैं । आरोपियों को यह निडरता कहाँ से मिली ?  क्या इन्हें कानून का जरा भी भय नहीं है  या फिर मल्हीपुर पुलिस से इनका पुराना याराना है जिसके चलते इन्हें अभय दान मिला हुआ है । वजह कुछ भी हो मगर अपराधियों पर पुलिस की ऐसी रहमदिली जाने अनजाने जरायम के पौध को खाद पानी दे रही  है । इसके परिणाम स्वरूप अपराधों की भावी फसलें लहलहायेगी । इनकी प्रेरणा से ही फिर कोई बहन फंदे पर झूलती नज़र आएगी , फिर कोई बेटी राख के ढेर में बदल जाएगी । मगर पुलिस के इक़बाल का क्या होगा  पुलिस कप्तान  स्वयं इस पर मंथन करे तो बेहतर है ।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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