पंजाब सरकार ने स्कूल फीसों के संबंधी हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती....

Punjab government challenges High Court's decision regarding school fees. share via Whatsapp

Punjab government challenges High Court's decision regarding school fees.

एल.पी.ए. दायर करके न्याय और इन्साफ के हित में 30 जून के फैसले पर रोक लगाने की मांग

इंडिया न्यूज सेंटर, चंडीगढ़ः
कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आज लॉकडाउन के समय के दौरान स्कूल फीसों की अदायगी से सम्बन्धित मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। सी.पी.सी. की धारा 151 के साथ नियम 5, हुक्म 41 के अंतर्गत सिंगल जज के फैसले के विरुद्ध दायर की लैटर पेटंट्स अपील (एल.पी.ए.) में राज्य सरकार ने ‘न्याय और इन्साफ के हित में ’ सिंगल जज के हुक्म के अमल और 30 जून के फैसले पर रोक लगाने की माँग की है। 30 जून के फैसले में हाई कोर्ट के सिंगल जज ने प्राईवेट स्कूलों को असरदार ढंग से हर तरह की फीस लेने की राहत दी थी, चाहे इन स्कूलों ने ऑनलाइन शिक्षा / क्लासों की पेशकश की हो या नहीं।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह इससे पहले भी प्राईवेट स्कूलों द्वारा कोविड के दौरान बंद के मद्देनजर ऑनलाइन या ऑफलाईन क्लासों न लगाने के बावजूद फीस वसूलने पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। यह मसला बुधवार को मंत्रीमंडल की मीटिंग के दौरान भी विचारा गया था और ऐडवोकेट जनरल अतुल नन्दा को हाई कोर्ट में एल.पी.ए. दायर करने के लिए कहा था।

एल.पी.ए. में यह नुक्ता उठाया गया कि प्राईवेट स्कूल वित्तीय कठिनाईयों और अपने खर्चों की पूर्ति में असमर्थ हो जाने की पैरवी करने के बावजूद इसको साबित करने के लिए कोई सबूत या सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं रख सके।

आगे यह देखा गया कि हाई कोर्ट ने अपने हुक्मों में इस तथ्य को अनदेखा किया है कि कोविड-19 के संकट स्वरूप माता-पिता को पेश मुश्किलों को घटाने के लिए पंजाब सरकार प्राईवेट स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस (इनके द्वारा ऑनलाईन शिक्षा मुहैया करवाने के कारण) लेने सम्बन्धी हुक्म जारी करने के लिए मजबूर था।
एल.पी.ए के अनुसार आपत्तिजनक आदेश और फैसला स्कूलों को ‘वास्तविक खर्च’ वसूलने की आज्ञा देते हुए ‘वास्तविक खर्च’ की जांच करने और तस्दीक करने के लिए कोई विधि मुहैया नहीं करवाता। इस तरह इस आपत्तिजनक हुक्म और फैसले को तामील करने और लागू करने में व्यावहारिक समस्याएँ हैं।

यह नुक्ता उभारते हुए कि पंजाब सरकार के आदेश न केवल आकस्मिक स्थिति से प्रेरित था बल्कि अस्थाई तौर पर अपनाया गया था, एल.पी.ए के अनुसार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस तथ्य को भी मुकम्मल तौर पर अनदेखा किया कि दूसरे राज्यों के हाई कोर्टों जिनके द्वारा समान आदेश नहीं होने पर भी लगभग एसे ही हुक्म जारी किये गए थे, द्वारा इस सम्बन्धी दखल नहीं दिया गया। एल.पी.ए के दर्शाने के अनुसार हरियाणा सरकार द्वारा जारी किये गए समान आदेशों को चुनौती देते हुए एसे ही मसले में एक कोर्डीनेट बैंच द्वारा हरियाणा के प्राईवेट स्कूलों को बिना अंतरिम या अन्य राहत देते हुए केवल केस को सितम्बर तक के लिए स्थगित किया गया है।

अपनी एल.पी.ए. में पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा 30 जून, 2020 को पास किये हुक्म के पास करने में अपनाई गई पक्षपाती पहुँच को भी उजागर किया है। इस अपील में स्कूलों के पक्ष वाली दायर पटीशनों को कायम रखने के मुद्दों को उठाने और अन्य एसे आपात समय के दौरान शक्तियों के बाँट और आर्टीकल 19 (1) (जी) की उपलब्धता के मामले को भी उभारा गया।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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