यूपीः खत्म हुआ पूर्ववांचल का खौफ

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UP: The Awe of purvanchal ended

मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल मे गोली मारकर हत्या

अशफाक खां व नवीन गोयल की रिपोर्ट,लखनऊ/मुजफ्फरनगर
बागपतः
पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपराध का बेताज बादशाह कहे जाने वाले कुख्यात माफिया डान प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी आखिरकार मौत के आगोश में चला गया । पिस्टल के जिस आकर्षण ने उसे खूंखार अपराधी बना दिया ऐसी ही एक पिस्टल से निकली गोलियों ने उसके गर्म जिस्म को ठंडा कर दिया । माफियाओं के जीवन का अंत गोलियों से ही होता है यह कथन काफी हद तक सही साबित हो रहा है ।  कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की सोमवार सुबह बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई ।  मुन्ना बजरंगी की हत्या के आरोपी सुनील राठी ने पूछताछ में बताया कि उसने ही मुन्ना बजरंगी पर आत्मरक्षा में उसी की पिस्टल छीनकर गोली मार दी। सुनील राठी का कहना है कि सुबह किसी बात पर उसकी मुन्ना बजरंगी से कहासुनी हो गई थी, जिसके बाद मुन्ना बजरंगी ने पिस्तौल निकाल ली और उस पर फायर करना चाहा, उसने मुन्ना बजरंगी से पिस्टल छीनकर उसी की पिस्टल से उसकी हत्या कर दी। अति सुरक्षा वाली जेल प में हुई हत्या की वारदात को लेकर विपक्षी दलों ने प्रदेश में कानून और व्यवस्था को लेकर सरकार के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं । घटना के कारण बचाव की मुद्रा में दिखे  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रूख अखित्यार करते हुए  बागपत जिला कारागार के जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डेन अरजिंदर सिंह और वार्डेन माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।  मुन्ना बजरंगी 13 साल पहले भारतीय जनता पार्टी के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में सजा भुगत रहे थे। उसके ऊपर हत्या के करीब 4० मामलों के अलावा रंगदारी और लूटपाट के भी कई मुकदमे थे। बहुजन समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में मुन्ना बजरंगी को कल रात ही झांसी से पेशी के लिए बागपत लाया गया था। ऐसी चर्चा है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या की साजिश पहले से ही रची जा रही थी जिसको लेकर उनकी पत्नी सीमा सिंह ने 29 जून को मुन्ना की हत्या किये जाने का अंदेशा जताते हुए मुख्यमंत्री से सुरक्षा की मांग की थी। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी रहे मुन्ना बजरंगी का पूर्वी उत्तर प्रदेश में जरायम की दुनिया का सबसे चर्चित नाम था। साल 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद दोष सिद्ध होने पर उसे 2009 में झांसी जिला जेल में निरूद्ध किया गया था। इस बीच अपर पुलिस महानिदेशक कारागार चंद्र प्रकाश ने बताया कि मुन्ना को कल रात एक मामले में पेशी के लिये बागपत लाया गया था, जहां तड़के जेल में झगड़े के दौरान उसे गोली मारी गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोली कुख्यात अपराधी सुनील राठी ने मारी, जिसके बाद हथियार को गटर में फेंक दिया। घटना जेल की सुरक्षा में गंभीर चूक है। पूरी घटना की न्यायिक जांच होगी। मुन्ना का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग में होगा। उन्होंने कहा कि मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सूचित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम एनएचआरसी के दिशा-निर्देश के आधार पर भी किया जाएगा। पूरे मामले की जांच के लिए टीमें पहुंच चुकी हैं।  उधर बागपत के पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश ने बताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता एवं पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत की एक अदालत में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। उसे कल रात झांसी जेल से बागपत लाया गया था। जेल में ही सुबह छह बजे साथी कैदी ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। राज्य के पुलिस उपमहानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीन कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच हत्या में कुख्यात अपराधी सुनील राठी का हाथ होने की बात सामने आई है। मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 29 जून को लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन में झांसी जिला जेल में निरूद्ध पति पर जानलेवा हमले की आशंका जताते हुये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप करने की गुहार लगायी थी। उसने आतंकवादी निरोधी दस्ता (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाते हुये कहा था कि कुछ पुलिस अधिकारी मेरे पति को फर्जी मुठभेड़ में मारना चाहते हैं। ऐसा तब होगा जब मुन्ना को पैरवी के लिये जेल से अदालत ले जाया जा रहा होगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुन्ना बजरंगी वर्ष 2009 से जेल में है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर सात लाख रुपये का इनाम रखा था जिसके बाद मुम्बई में उसे गिरफ्तार किया गया। जेल में रहकर उसने 2012 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया था। जौनपुर के मडियाहूं सीट से अपना दल और पीस पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर वह चुनाव लड़ा और 12 फीसदी मत हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया था। हथियारों के शौकीन मुन्ना का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। पांचवीं कक्षा के बाद मुन्ना ने पढ़ाई छोड़ दी और किशोरावस्था मेें ही अपराध की दुनिया में कदम रखा। सात लाख के ईनामी रह चुके मुन्ना बजरंगी ने सतरह साल की उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रखा। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया था। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। वर्ष 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी थी। बाद में गजराज के इशारे पर ही उसने जौनपुर में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में दबदबा कायम कर लिया। पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में क्षेत्र के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के साथ जुड़ गया। इन लोगों का मऊ से कार्य संचालित होता था। इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। उसके बाद इस गिरोह की ताकत बहुत बढ़ गई और मुन्ना बजरंगी सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था। ठेकेदारी और सरकारी ठेकों में मुख्तार का कब्जा था,लेकिन तेजी से उभरते भाजपा विधायक कृष्णानंद राय उसके लिए चुनौती बनने लगे। श्री राय पर मुख्तार के विरोधी ब्रिजेश सिह का हाथ था। उसके संरक्षण में कृष्णानंद राय का दबदबा इलाके में बढ़ रहा था। कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था और मुख्तार ने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी। मुख्तार के फरमान के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची और 29 नवंबर 2005 को मुन्ना बजरंगी ने अपने गुर्गों के साथ कृष्णानंद राय के अलावा उनके छह साथियों की हत्या कर दी। इस हत्याकांड के बाद आतंक का पर्याय बने मुन्ना की तलाश में उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई लगी थी। उस पर सात लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण वह मुंबई चला गया। उसने राजनीति में किस्मत आजमायी और लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे। यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहा था। मुन्ना बजरंगी ने कई राजनीति दलों में अपनी पैंठ बनाने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुके मुन्ना को 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी। विपक्षी दलों ने जेल में हुई इस हत्या के लिए योगी सरकार के कानून और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए किये जा रहे बड़े-बड़े दावों पर हमला करते हुए कहा कि जब राज्य की अति सुरक्षा वाली जेलों में इस तरह की घटनाएं हो रही है तो सामान्य हालत क्या होंगे। इस बीच मुन्ना बजरंगी की हत्या के आरोपी सुनील राठी ने पूछताछ में बताया कि उसने ही मुन्ना बजरंगी पर आत्मरक्षा में उसी की पिस्टल छीनकर गोली चलाई। सुनील राठी ने बताया कि सुबह किसी बात पर उसकी मुन्ना बजरंगी से कहासुनी हो गई थी, जिसके बाद मुन्ना बजरंगी ने पिस्तौल निकाल ली और उस पर फायर करना चाहा, उसने मुन्ना बजरंगी से पिस्टल छीनकर उसी की पिस्टल से उसकी हत्या कर दी। मुन्ना बजरंगी की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल बरामद कर ली गई है। इसके अलावा दो मैग्जीन, 22 जिंदा कारतूस, दस खोखे व 32 एम.एम. की पिस्टल गटर से बरामद की गई है


कौन है मुन्ना बजरंगी का हत्यारा सुनील राठी ---

 कुख्यात सुनील राठी पश्चिम उत्तरप्रदेश के जिला बागपत के टीकरी गांव का रहने वाला है और दोघट थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसने 18 साल पहले उस समय अपराध की दुनिया में कदम रखा था जब उसके पिता नरेश राठी की बड़ौत के पास हत्या कर दी गई थी। उसके बाद सुनील ने वर्तमान नगर पंचायत टीकरी अध्यक्ष के भाई महक ¨सह और तेहरे भाई मोहकम ¨सह को कस्बे में ही गोलियों से भून दिया था। सुनील ने कस्बे में ही सुधीर और उसके बाद सोमपाल राठी के ही तेहरे भाई महिपाल और पंजाब के जगतार की हत्या कर दी थी। महिपाल और जगतार ¨सह शादी समारोह से लौट रहे थे। महक ¨सह और मोहकम की हत्या में अदालत ने 11 साल पहले सुनील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन इससे पहले वह वेस्ट यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में गिरोह फैला चुका था। इसलिए उसके इशारे पर ही गिरोह के सदस्य लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम देते रहे है।


कितनी सुरक्षित रही जेल --
 आंकड़े बताते हैं कि जेल व पुलिस अभिरक्षा से अपराधियों के भागने की घटनाओं में  कमी आई है। वर्ष 2015 में कारागार अभिरक्षा से 13 व पुलिस अभिरक्षा से 49 बंदी फरार हुए ।  जबकि वर्ष 2016 में यह आंकड़ा 17 व 92 का था।  2017 में कारागार अभिरक्षा से 11 व पुलिस अभिरक्षा से 31 बंदी भागे। कारागार व पुलिस अभिरक्षा में वर्ष 2015 में 20 व वर्ष 2016 में 25 आत्महत्या की घटनाएं भी हुई । वर्ष 2017 में ऐसी पांच घटनाएं हुई हैं। वाराणसी के केंद्रीय जेल में 13 मई 2005 को मुन्ना बजरंगी के साथी अन्नू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी तो वहीं  17 जनवरी 2015 को मथुरा जेल में बंदियों के दो गुटों के बीच हुए संघर्ष में रिवाल्वर से फायरिंग में बंदी पिंटू उर्फ अक्षय सोलंकी की मौत हो गई थी, जबकि अपराधी राजेश टोटा को अस्पताल ले जाते समय बदमाशों ने रास्ते में मौत के घाट उतार दिया था।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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