कोरोना ने बदली भारत की 16 साल पुरानी नीति, अब तक 40 देशों से ली मददः आत्मनिर्भर छवि बनाने को बंद की थी विदेशी सहायता

Corona changed India's 16-year-old policy, so far, help from 40 countries: stopped foreign trade to to build aatmanirbhar bharat image share via Whatsapp

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न्यूज डेस्क, नई दिल्लीः महामारी कोरोना वायरस पिछले एक साल से भारत में तबाही मचा रहा है। देश में पिछले कई दिनों से साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए कोरोना मरीज मिल रहे हैं। महामारी के तांडव के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। अस्पताल ऑक्सीजन, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी का सामना कर रहे हैं। इसके बाद भारत ने विदेशी सहायता प्राप्त करने की अपनी नीति में 16 साल बाद बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद उसने विदेश से मिलने वाले उपहार, दान एवं सहायता को स्वीकार करना शुरू किया है। साथ ही चीन से भी चिकित्सा उपकरण खरीदने का फैसला किया है। 

एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि कोरोना महामारी की मार के चलते विदेशी सहायता प्राप्त करने के संबंध में दो बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। भारत को अब चीन से ऑक्सीजन से जुड़े उपकरण एवं जीवन रक्षक दवाएं खरीदने में कोई 'समस्या' नहीं है। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी भारत को मदद की पेशकश की है। जहां तक पाकिस्तान से सहायता हासिल करने का सवाल है, तो भारत ने इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है। सूत्र ने बताया कि राज्य सरकारें विदेशी एजेंसियों से जीवन रक्षक दवाएं खरीद सकती हैं, केंद्र सरकार उनके रास्ते में नहीं आएगी।

आत्मनिर्भर छवि बनाने को बंद की थी विदेशी सहायता

भारत अपनी उभरते ताकतवर देश और अपनी आत्मनिर्भर छवि पर जोर देता आया है। 16 साल पहले मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने विदेशी स्रोतों से अनुदान एवं सहायता न लेने का फैसला किया था। इससे पहले, भारत ने उत्तरकाशी भूकंप (1991), लातूर भूकंप (1993), गुजरात भूकंप (2001), बंगाल चक्रवात (2002) और बिहार बाढ़ (2004) के समय विदेशी  सरकारों से सहायता स्वीकार की थी। 16 साल बाद विदेशी सहायता हासिल करने के बारे में ये निर्णय नई दिल्ली की रणनीति में बदलाव है। 

मनमोहन सिंह ने की थी घोषणा, नहीं लेंगे विदेशी मदद

दिसंबर, 2004 में आई सुनामी के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोषणा करते हुए कहा, ''हमारा मानना है कि हम खुद से इस स्थिति का सामना कर सकते हैं। यदि जरूरत पड़ी तो हम उनकी मदद लेंगे।'' मनमोहन सिंह के इस बयान को भारत की आपदा सहायता नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया। इसके बाद आपदाओं के समय भारत ने इसी नीति का पालन किया। वर्ष 2013 में आई केदारनाथ त्रासदी और 2005 के कश्मीर भूकंप और 2014 की कश्मीर बाढ़ के समय भारत ने विदेशी सहायता लेने से साफ इनकार कर दिया। 

केरल बाढ़ के वक्त यूएई ने की थी मदद की पेशकश

वर्ष 2018 में केरल में आई बाढ़ के समय भी भारत ने विदेशों से कोई सहायता स्वीकार नहीं की थी। केरल सरकार ने केंद्र को बताया कि यूएई ने 700 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की पेशकश की है, लेकिन केंद्र सरकार ने किसी भी तरह की विदेशी सहायता लेने से इनकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि राहत एवं पुनर्वास की जरूरतों को वह अपने तरीकों से पूरा करेगा। 

कोरोना संकट: 20 देश मदद के लिए आगे आए

कोरोना महामारी की मार झेल रहे भारत की मदद के लिए करीब 20 देश आगे आए हैं। भूटान ने ऑक्सीजन की आपूर्ति करने की पेशकश की है। अमेरिका अगले महीने एस्ट्राजेनेका के टीका भेज सकता है। इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्जमबर्ग, पुर्तगाल, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, भूटान, सिंगापुर, सऊदी अरब, हांगकांग, थाइलैंड, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, नार्वे, इटली और यूएई मेडिकल सहायता भारत भेज रहे हैं।  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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