एसपी गौरव ग्रोवर की छवि को धूमिल कर रही दरगाह पुलिस

Dargah police blurring the image of SP Gaurav Grover share via Whatsapp

Dargah police blurring the image of SP Gaurav Grover


जानलेवा हमले के आरोपियों को थाने से चंद घंटों में छोड़ा


अशफांक खां की रिपोर्ट
बहराइचः
थाना मोतीपुर में कथित तौर पर पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत से जनपद पुलिस के दामन पर लगे दाग अभी हल्के भी नहीं हो पाए थे कि दरगाह पुलिस के एक और कारनामे ने आदर्श पुलिसिंग की पोल एक बार फिर से खोल दी है। कानून तोड़ने वाले पर दरगाह पुलिस की ऐसी रहमदिली जाने अनजाने बहराइच एसपी डॉ गौरव ग्रोवर की स्वच्छ छवि को धूमिल कर रही है। मामला दरगाह थाना क्षेत्र के फुलवरिया धोबियन पुरवा का है जहां रविवार को मधुमक्खी के छत्ते से शहद निकालने को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हो गई जिसमे एक पक्ष के 2 लोगों को गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं आरोपियों को पुलिस थाने पर लाकर चंद घंटे के बाद ही छोड़ देती है।  जानकारी के अनुसार धोबियन पुरवा निवासी राजित राम के इमली के पेड़ पर मधुमक्खियों ने छाता लगा रखा था। उसका पड़ोसी कटकू  चाहता था कि वह छत्ते से शहद निकाल ले परंतु राजित राम इसके लिए सहमत नहीं हुआ। इसी बीच पड़ोस के गांव निबिया के खलील ने राजित राम से अनुरोध किया कि उसे इलाज के लिए शहद की आवश्यकता है तो राजित राम ने खलील को शहद काटने की इजाजत दे दी। आरोप है कि इस बात से बौखलाए उसके पड़ोसी बरसाती व उसके दोनों पुत्र कटकू व बलराम ने गाली गलौज शुरू कर दिया फिर नौबत मारपीट तक आ गई। राजित राम का कहना है कि उक्त लोग ने लाठी व गड़ासा से लैस होकर उसके परिजनों पर धावा बोल दिया।घर के बाहर खड़े अन्नू पुत्र नागेश्वर लाठी व गड़ासे  के हमले से वहीं पर गिर पड़े जबकि जान बचाने की नियत से घर के अंदर भागे अन्नू के भाई बुधई को हमलावरों ने घर में घुसकर गंडासा से हमला कर उसे जान से मारने की नियत से घर से बाहर घसीटते हुए ले आए ।इस दौरान बीच बचाव कर रहे राजित राम को भी चोटें आई।बताया जा रहा है कि इस विवाद में दूसरे पक्ष के बरसाती को भी चोटें आई हैं आसपास के लोगों के पहुंचने के बाद जब तक मामला शांत होता अन्नू और बुधई  गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। सूचना पर पहुंची डायल 100  की वाहन संख्या 1537 ने तीनों आरोपियों बरसाती , कटकू व  बलराम को गाड़ी में बिठा कर थाने ले जाने की बात कही मगर संदिग्ध कारणों से आरोपी बलराम को रास्ते में ही छोड़ दिया। शेष दो आरोपियों को थाने ले जाया गया जहां पर कुछ घंटों के बाद ही दरगाह पुलिस ने दोनों हमलावरों को भी छोड़ दिया । घटनास्थल पर फैला खून व जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे घायलों को देखने के बाद भी पुलिस मामले की संजीदगी को या तो समझ नहीं पाई या फिर समझना ही नहीं चाह रही। नतीजा उक्त हमलावर पुलिस की पकड़ में आने के बाद भी आजाद घूम रहे हैं। बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर किन परिस्थितियों में स्थानीय पुलिस ने आरोपियों को मुक्त किया और पुलिस पर आखिर कौन सा दबाव था जिसके चलते इतने बड़े विवाद में निरोधात्मक कार्रवाई तक करने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई । गांव में खुलेआम घूम रहे हमलावरों को देख ग्रामीण द्वारा पुलिस की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल उठाया जा रहा है। वह भी ऐसे समय में जब जिले की कानून व्यवस्था की बागडोर डॉ गौरव ग्रोवर जैसे न्याय प्रिय अधिकारी संभाल रहे हैं। ऐसे में बेलगाम और लापरवाह हो चुकी दरगाह पुलिस को मित्र पुलिस का जामा पहनाना डॉ ग्रोवर के लिए कितना चुनौतीपूर्ण होगा यह भविष्य के गर्भ में है।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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