जुए पर जारी रहेगा प्रतिबंध, सामने आईं रिपोर्ट्स गलतःविधि आयोग

The ban on gambling will continue, the reports came up are wrong share via Whatsapp

The ban on gambling will continue, the reports came up are wrong

नेशनल डेस्कः
विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान का कहना है कि पैनल की सट्टे और जुए पर आई रिपोर्ट को गलत बताया है। हमने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा, 'आयोग ने साफ किया है कि वह दृढ़ता और स्पष्ट रूप से यह अनुशंसित करना चाहता है कि वर्तमान परिस्थितियो में भारत में सट्टे और जुए को कानूनी मान्यता देना वांछनीय नहीं है। साथ ही गैरकानूनी सट्टे और जुए पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।' जस्टिस चौहान ने कहा कि आयोग ने सुझाव दिए हैं कि केंद्र और राज्य सरकारों को सट्टेबाजी और जुए को वैध बनाने की आवश्यकता महसूस होने पर प्रभावी विनियमन के लिए कौन से उपायों को अपनाया जाना चाहिए। दोबारा यह साफ कर देना चाहता हूं कि आयोग की सिफारिश है कि जुए पर नियंत्रण के लिए प्रभावी नियमन ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है। अगर ऐसा संभव नहीं होता तो पूरी तरह से प्रतिंबध लगा दिया जाए। विधि आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जुए के ऐसे नियमन के लिए तीन स्तरीय रणनीति की जरूरत है। पहला- सट्टेबाजी के वर्तमान बाजार (लॉटरी, घुड़दौड़) में संशोधन, दूसरा- अवैध सट्टेबाजी को नियमों के अंतर्गत लाना और तीसरा- सख्त और महत्वपूर्ण कानून को लागू करना। जस्टिस चौहान ने कहा कि यदि सरकार सट्टेबाजी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की बजाए इसे सशर्त वैधता प्रदान करना चाहती है तो जिन्हें सब्सिडी मिलती है या जो आयकर कानून या जीएसटी कानून के दायरे में नहीं आते हैं उन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरह के सट्टेबाजी की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि सरकार को समाज के पिछड़े वर्ग को इसका शिकार होने से बचाने के लिए एक व्यवस्था बनाना सुनिश्चित करना चाहिए।
बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि विधि आयोग ने सट्टा और जुए को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की है। विधि आयोग ने परोक्ष और अपरोक्ष टैक्स सिस्टम के तहत जुआ खेलने व सट्टेबाजी करने को मान्यता देकर इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने का जरिया बनाने की सिफारिश की है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संसद इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 249 या 252 के तहत कानून बना सकती है।

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Source: INDIA NEWS CENTRE

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